पाठ्यक्रम: GS3/ जैव विविधता और संरक्षण
संदर्भ
- ग्लोबल कोरल रीफ मॉनिटरिंग नेटवर्क (GCRMN) द्वारा जारी ‘स्टेटस ऑफ कोरल रीफ्स ऑफ द वर्ल्ड’ की सातवीं रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवाल भित्तियों के पुनर्स्थापन की अवधि में नाटकीय रूप से कमी आई है।
- प्रवाल भित्तियाँ अब अधिक बार विरंजन (Bleaching) की घटनाओं का सामना कर रही हैं, जिसके कारण अत्यधिक ऊष्मीय तनाव की अवधियों के बीच उन्हें पुनर्स्थापित होने के लिए पहले की तुलना में कम समय मिल रहा है।
प्रमुख बिंदु
- वर्ष 2010 के बाद अनेक क्षेत्रों में प्रमुख व्यवधान प्रत्येक चार से छह वर्ष में घटित हो रहे हैं, जबकि पूर्व में ऐसी घटनाएँ लगभग एक दशक में एक बार होती थीं।
- वैश्विक कठोर प्रवाल आवरण में 1980–2009 की संदर्भ अवधि की तुलना में अनुमानतः 9.5% की कमी आई है।
- वर्ष 2024 में 40% से अधिक प्रवाल भित्तियों ने इतना गंभीर ऊष्मीय तनाव झेला कि उनमें प्रवाल विरंजन और मृत्यु का जोखिम उत्पन्न हो गया।
- रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन से प्रेरित तथा स्थानीय दबावों से और गंभीर हुई समुद्री ऊष्मा-तरंगें प्रवाल भित्तियों को दीर्घकालिक गिरावट की ओर धकेल सकती हैं।
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में पर्याप्त कमी के अभाव में वैश्विक तापन 2°C से अधिक हो जाएगा तथा समुद्री ऊष्मा-तरंगें बनी रहेंगी और अधिक तीव्र होंगी, जिससे प्रवाल भित्तियों में और अधिक गिरावट आएगी।
प्रवाल क्या हैं?
- प्रवाल अकशेरुकी जीव (Invertebrates) हैं, जो निडेरिया (Cnidaria) नामक जीवों के एक बड़े समूह से संबंधित हैं।
- प्रवाल अनेक छोटे, कोमल जीवों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पॉलीप (Polyps) कहा जाता है।
- ये पॉलीप अपनी सुरक्षा के लिए अपने चारों ओर चट्टान जैसी, खड़िया-युक्त कैल्शियम कार्बोनेट की बाह्य कंकाल संरचना का निर्माण करते हैं।
- इस प्रकार, लाखों सूक्ष्म पॉलीप मिलकर विशाल कार्बोनेट संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जिन्हें प्रवाल भित्तियाँ कहा जाता है।
- रंग-रूप: प्रवालों का रंग लाल से लेकर बैंगनी और यहाँ तक कि नीला भी हो सकता है, किंतु इनमें सामान्यतः भूरे और हरे रंग के विभिन्न शेड पाए जाते हैं।
- प्रवालों के चमकीले एवं रंगीन दिखाई देने का प्रमुख कारण उनके ऊतकों में पाए जाने वाले सूक्ष्म शैवाल जूक्जैंथेली (Zooxanthellae) हैं।
- प्रवाल भित्तियाँ मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं—
- तटीय प्रवाल भित्तियाँ (Fringing Reefs): ये समुद्र तट के साथ-साथ विकसित होती हैं।
- अवरोधक प्रवाल भित्तियाँ (Barrier Reefs): ये खुले समुद्री जल में तट से कुछ दूरी पर विकसित होती हैं।
- एटॉल (Atolls): ये वृत्ताकार प्रवाल भित्तियाँ होती हैं, जो जलमग्न ज्वालामुखियों के चारों ओर विकसित होती हैं।
- भारत में प्रवाल भित्तियाँ: कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप द्वीपसमूह तथा मालवन में प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं।
- महत्व: प्रवाल भित्तियाँ समुद्री जीव-जगत के लगभग एक-चौथाई हिस्से को भोजन, आश्रय, विश्राम तथा प्रजनन के लिए स्थान प्रदान करती हैं। इस प्रकार वे महत्वपूर्ण जैव-विविधता के संरक्षण के लिए प्राकृतिक नर्सरी एवं शरणस्थली के रूप में कार्य करती हैं।
- इसके अतिरिक्त, विश्व के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले 1 अरब से अधिक लोगों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा तथा मनोरंजन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी प्रवाल भित्तियाँ महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
प्रवाल विरंजन
- प्रवाल विरंजन तब होता है जब प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले रंगीन सहजीवी शैवाल को बाहर निकाल देते हैं।
- इन लाभकारी शैवालों के अभाव में प्रवाल फीके या सफेद दिखाई देने लगते हैं तथा उनमें भुखमरी और रोग का खतरा बढ़ जाता है।
- विरंजित प्रवाल अनिवार्य रूप से मृत नहीं होते, लेकिन उनके पुनर्स्थापन की संभावना के लिए समुद्र के तापमान में कमी आना आवश्यक है।
प्रवाल विरंजन के कारण
- समुद्री ऊष्मा-तरंगें एवं जलवायु परिवर्तन: समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान से प्रवाल और शैवाल के बीच का सहजीवी संबंध बाधित होता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक प्रवाल विरंजन और मृत्यु हो सकती है।
- महासागरीय अम्लीकरण: महासागरों में CO₂ के बढ़ते घुलाव से समुद्री जल का pH मान कम होता है, जिससे प्रवालों के लिए अपने कंकाल का निर्माण करना कठिन हो जाता है।
- प्रदूषण: भूमि से बहकर समुद्र में पहुँचने वाले उर्वरक, कीटनाशक तथा सीसा जैसी भारी धातुएँ प्रवालों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय दबावों को सहन करने की क्षमता को हानि पहुँचाती हैं।
- भौतिक व्यवधान: तटीय विकास, असंधारणीय मत्स्यन, अवसादन तथा प्रवाल खनन जैसी गतिविधियाँ प्रवाल भित्तियों को प्रत्यक्ष रूप से क्षतिग्रस्त या अवसाद से ढक देती हैं।
- अति-मछली पकड़ना (Overfishing): इससे उन मछलियों की संख्या कम हो जाती है जो प्रवाल भित्तियों पर शैवाल की वृद्धि को नियंत्रित करती हैं। परिणामस्वरूप प्रवाल पारिस्थितिकी तंत्र का और अधिक क्षरण होता है।
क्या प्रवाल विरंजन से पुनः स्वस्थ हो सकते हैं?
- हाँ, प्रवाल समय के साथ विरंजन से पुनः स्वस्थ हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए समुद्र के तापमान में कमी आना और पर्यावरणीय परिस्थितियों का सामान्य स्थिति में लौटना आवश्यक है।
- ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर सहजीवी शैवाल पुनः प्रवालों के ऊतकों में लौट आते हैं और प्रवाल धीरे-धीरे अपना स्वास्थ्य एवं सामान्य स्थिति पुनः प्राप्त कर सकते हैं।
Source: DTE
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संक्षिप्त समाचार 03-09-2026